दिन रात की जिस रेस में हम सब भाग ले रहे है, कभी ना खत्म होने वाला सफर है। पैसा कमाने में इतना उलझ गए है कि खुद को ओर अपनों को भूल ही गए है। ख्वाबो को पूरा करने में हम सब सच्चाई से बहुत दूर चले गए हे, हम सब एक झुठी और नकली दुनिया में जी रहे है।
सच है, पर कङवा है।